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अमृतसर फर्जी मुठभेड़ मामला : 31 साल बाद 3 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा

अमृतसर, 15 सितंबर | 1992 फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई कोर्ट ने अमृतसर के 3 पूर्व पुलिसकर्मियों इंस्पैक्टर धर्म सिंह, एएसआई सुरिंदर सिंह और गुरदेव सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों पुलिसकर्मियों पर 2-2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। साल 1992 में तीन युवकों हरजीत सिंह, लखविंदर सिंह और जसपिंदर सिंह पर 9 पुलिसकर्मियों ने झूठा आरोप लगाया था।

31 साल बाद अपने पिता की मौत का न्याय मिलने पर बुट्टर सेवियां निवासी मृतक हरजीत सिंह के बेटे रामप्रीत सिंह ने कहा कि वह एक साल का था जब उसके पिता को इन पुलिसकर्मियों ने मार डाला था। भगवान के घर में देर है, अंधेर नहीं।

रामप्रीत सिंह ने कहा कि परिवार एक बार हिम्मत हार चुका था। ऐसा लग रहा था कि न्याय नहीं मिलेगा लेकिन दादा ने हिम्मत नहीं हारी। इस मामले में सीबीआई की ओर से 57 गवाह पेश किए गए थे और 9 के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था। इन 31 सालों में 5 आरोपियों की मौत हो गई, 27 गवाह नहीं बचे।

इस मामले में मृतक के पिता हरजीत सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। उस वक्त मृतक के पिता को यह नहीं पता था कि पुलिस ने उनके बेटे की हत्या कर दी है. पिता ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे हरजीत सिंह को पुलिस ने 29 अप्रैल 1992 को अमृतसर के सठियाला के पास थठियां बस स्टैंड से उठाया था और मॉल मंडी के पूछताछ केंद्र में रखा था।

तुरंत कार्रवाई करते हुए, उच्च न्यायालय ने हरजीत सिंह की अवैध पुलिस हिरासत से रिहाई सुनिश्चित करने के लिए एक वारंट अधिकारी नियुक्त किया। इस मामले को आगे बढ़ाते हुए हाई कोर्ट ने दिसंबर 1992 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंडीगढ़ को मामले की न्यायिक जांच के आदेश जारी किए थे, जिसकी रिपोर्ट वर्ष 1995 में प्रस्तुत की गई थी। रिपोर्ट के आधार पर 30 मई 1997 को हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।

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