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बड़ी खबर: बिहार कांग्रेस के विधायक हैदराबाद रवाना, ऑपरेशन लोटस से बचाव की कोशिश

नई दिल्ली, 4 फरवरी | शनिवार को दिल्ली में पार्टी की बैठक में शामिल होने के बाद, बिहार कांग्रेस ने अपने 19 में से 16 विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से हैदराबाद भेज दिया है। कांग्रेस को डर है कि 12 फरवरी से शुरू हो रहे बिहार विधानसभा के बजट सत्र में NDA अपनी सरकार का बहुमत साबित करने के लिए ऑपरेशन लोटस का इस्तेमाल कर सकती है।

विधायकों को बंधुआ मजदूर नहीं मानते कांग्रेस नेता
कांग्रेस विधायक दल के नेता अखिलेश सिंह ने कहा कि विधायकों को बंधुआ मजदूर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि विधायक जनता का फैसला लेकर आते हैं और उन्हें अपना निर्णय स्वयं लेने में सक्षम होना चाहिए।

दलबदल कानून से बचने के लिए 13 का टूटना होगा
दलबदल कानून के अनुसार, यदि कांग्रेस के विधायक दलबदल करते हैं, तो 19 में से 13 विधायकों को एक साथ दूसरी पार्टी में जाना होगा। कांग्रेस में कोई ऐसा चहेता नेता नहीं है जिसे मंत्री बना दिया जाए तो 12 विधायक उसके साथ चले जाएंगे।

ऑपरेशन लोटस का क्या है मतलब?
2008 में कर्नाटक में सियासी उठा-पटक के दौरान ऑपरेशन लोटस शब्द पहली बार चर्चा में आया था। यह बीजेपी का कोई अभियान नहीं है, बल्कि विपक्ष को तोड़कर सरकार बनाने की बीजेपी की कवायद को ऑपरेशन लोटस कहा जाता है।

विधायकों को मंत्री पद और लोकसभा टिकट का लालच
एनडीए गठबंधन कांग्रेस विधायकों को मंत्री पद और लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका देकर उन्हें अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर सकता है। तेजस्वी यादव ने पहले ही कह दिया है कि “खेला तो बिहार में अब शुरू होगा”।

कांग्रेस विधायकों को हैदराबाद में रखने का फैसला
कांग्रेस ने अपने विधायकों को हैदराबाद में रखने का फैसला इसलिए किया है ताकि उन्हें ऑपरेशन लोटस से बचाया जा सके। विधायकों को बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने पर बुलाया जाएगा। यह घटना बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह देखना बाकी है कि ऑपरेशन लोटस कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचाता है।

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