अम्बाला, 6 जुलाई : हरियाणा में विधानसभा चुनाव सिर पर है। वहीं कांग्रेस आलाकमान ने यह साफ कर दिया है कि हरियाणा के आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा कोई भी नहीं होगा और बहुमत आने पर कुर्सी का फैसला विधायकों की राय से होगा। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बाबरिया व पार्टी की वरिष्ठ नेत्री सैलजा ने भी पार्टी के अपने-अपने नेताओं व कार्यकर्ताओं तक पार्टी का यही सन्देश पहुंचा दिया हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने भी इस पर कोई एतराज जाहिर नहीं किया है। उनके समर्थकों का मानना है कि 2019 की तरह इस बार भी दो तिहाई विधायक हुड्डा खेमे के ही जीत कर आने वाले हैं।
पिछले दो विधानसभा चुनावों की तरह इस बार भी कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व को चुनावी जिम्मेदारी सौंपेगी। यह चुनावी नतीजों से पता चलेगा कि चुनाव की कमान एक नेता के हाथों में सौंपना बेहतर था या फिर सामुहिक नेतृत्व ज्यादा व्यवहारिक रहा। सियासत में कुछ नहीं पता होता कि बहुमत आने के बाद भी कुर्सी को लेकर कब क्या उलटफेर हो जाए। पार्टी के इस फैसले की एक बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि कांग्रेस में कम से कम आधा दर्जन ऐसे दिग्गज नेता हैं, जो अपना कद मुख्यमंत्री से कम नहीं मानते और वे किसी की चौधर मानने को तैयार नहीं है। फिलहाल पार्टी मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदारों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा व पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव सांसद सैलजा हैं।