क्लेम फार्म पर साइन करवाने आए व्यक्ति से की बदतमीजी, मारे थप्पड़, गला भी घाेंटा
जालंधर| बेटी के इलाज के लिए पहले पिम्स में धक्के और अब ईएसआई जालंधर में मारपीट व खजलखवारी। कुछ एेसा ही हुआ एक पिता के साथ। हुआ यूं कि इलाज पर आए खर्च को लेकर ईएसआई अस्पातल में रिइंबर्ससमैंट फार्म (बिल) पास करवाने संबंधी डाक्टर के साइन करवाने एक अमन नामक व्यक्ति डिस्पैंसरी नंबर-1 में आया था। इस दौरान जिस हरिपाल सिंह नामक डाक्टर ने साइन करने थे उससे पहले ही कहासुनी हाे गई फिर एकाएक मामले ने तूल पकड़ा और पीडि़त द्वारा लगाए गए आरोपों मुताबिक डाक्टर ने पहले गले से पकड़ा फिर दबा दिया और थप्पड़ मारने शुरू कर दिए। इस पर स्टाफ के सदस्य आगे आए और फिर पास ही खड़े व्यक्ति की सहायता से डाक्टर को समझाकर पीडि़त से दूर किया।
हां मैं हां चुलबुल पांडे जा जाे करना है कर लै…
इस दौरान पीडि़त व्यक्ति अमन ने बताया कि जब उसने डाक्टर से कहा कि इन फार्मों पर साइन कर दें तो डाक्टर ने साफ-साफ कह दिया की इस तरह साइन नहीं होते तो उसने पूछा कि इसमें कमी रह गई है बताओ इस पर डाक्टर साहब भड़क गए और साफ इन्कार कर दिया फिर उसने डाक्टर काे कहा कि एेसा करने पर आप पर कारर्वाई हाे सकती है िजस पर आराेप है कि डाक्टर ने कहा मैं नहीं डरदा, नाम पूछा तो डाक्टर ने कहा कि ‘मेरा नाम चुलबुल पांडे है जा जाे करना कर लै जा के। उसने अपना नाम तक नहीं बताया। इस दौरान मीडिया समक्ष उक्त घटना दौरान मौके पर मौजूद एक अन्य मरीज ने भी पीडि़त व्यक्ति अमन द्वारा डा. हरिपाल सिंह पर लगाए गए आरोपों को सही ठहराया। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी द्वारा कहा गया कि डाक्टर हरी पाल सिंह का रवैया मरीजों के प्रति बहुत ही नकारात्मक रहता है।
मैंने नहीं कही कोई चुलबुल पांडे वाली बात, सब गलत
इस दौरान जब डाक्टर का पक्ष लिया गया तो डाक्टर हरिपाल सिंह ने कहा कि उसने कोई हाथापाई नहीं की और जो चुलबुल पांडे वाली बात कही जा रही है वह भी निराधार है। ऐसा कुछ हुआ ही नहीं।
हां बहसबांजी हुई है : क्लर्क हरजिंदर सिंह
उधर ईएसआई अस्पताल के स्टाफ क्लर्क हरजिंदर सिंह ने भी डाक्टर और व्यक्ति के बीच बहसबाजी होने की बात को माना है, जबकि आरोपी डाक्टर ने मीडिया के समक्ष पीडि़त व्यक्ति द्वारा धक्का-मुक्की करने तथा थप्पड़ मारने के आरोपों को गलत ठहराया है। उधर एसएमओ ऑर्थो ने कहा कि मामला मेरे भी ध्यान में आया है और अगर इसमें उक्त डाक्टर आरोपी है तो विभाग के प्रमुख की जानकारी में सारा मामला लाकर मामले संबंधी संज्ञान लिया जाएगा।
सामाजिक संस्थानों से दवाएं दान लेकर चलाया जा रहा ईएसआई
ईएसआई अस्पताल में कई माह से दवाएं खत्म हैं तो इलाज क्या हो रहा होगा आप खुद ही अंदाजा लगा लें। अगर दवाएं ही नहीं पूरी तो आराम कैसे मिलेगा। जानकारी अनुसार डिस्पैंसरियों में कई बार सामाजिक संस्थाओं से दवाएं लेकर काम चलाया जा रहा है और वो भी हलकी-फुल्की बीमारी में ही काम आ रही हैं। पहले पर्ची के लिए मारामारी, फिर डाक्टर साहिब का रौब और इसके बाद दवाओं वाले काऊंटर पर मिलता है कोरा जवाब दवाएं खत्म हैं बाहर से लें लो और पर्ची पर लिखकर हाथ में इनकार का झुनझुना थमा दिया जाता है। इसके बाद लाचार व बेबस मरीज दुखी मन से घर को लौट जाता है। आखिर हर माह ईएसआई को अंशदान देकर मिलता क्या है। दवाएं कब आएंगी किसी को कोई पता नहीं हर कोई मासिक सैलरी लेता है और चला जाता है पीछे कुछ बचता है तो वो है एक कर्मचारी की आहें।