नई दिल्ली, 5 जुलाई देश में वायु प्रदूषण की समस्या इस कदर भयावह हो गई है कि इसकी वजह से मृत्यु दर में वृद्धि होने लगी है। लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल मे प्रकाशित एक अध्ययन ने स्याह तस्वीर पेश की है। इसके अनुसार दिल्ली सहित देश के 10 शहरों में प्रतिवर्ष हवा में पीएम-2.5 के कणों की अधिकता के कारण लगभग 33,000 लोगों की मौत हो रही है। इसमें सिर्फ दिल्ली में ही 12 हजार लोगों की जान जा रही है, जो प्रतिवर्ष होने वाली कुल मौत का 11.5 प्रतिशत है।
राजधानी में 100 में से 12 लोगों की मौत खराब हवा के कारण होती है। वाराणसी में वायु प्रदूषण से होने वाली मौत 10 प्रतिशत से अधिक है। कोलकाता में 7.3, पुणे में 5.9, अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद में वायु प्रदूषण से होने वाली मौत 5.6 प्रतिशत है। शिमला जैसी जगह पर यह 3.7 प्रतिशत है।भारत के स्वच्छ वायु मानदंड विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 15 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के मानक से चार गुना अधिक है।
दिल्ली को विश्व का सबसे प्रदूषित शहर
यही कारण है कि वायु प्रदूषण के लिहाज से बेहतर माने जाने वाले शहरों में भी लोगों की जान जा रही है। कुछ माह पहले एक रिपोर्ट में दिल्ली को विश्व का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया था। अदालत से लेकर संसद तक चिंता जताने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं है।
माना जाता है कि मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में हवा अपेक्षाकृत साफ रहती है, परंतु इन शहरों में भी प्रदूषण से मरने वालों की संख्या अधिक है। इसका कारण हवा में पीएम 2.5 का स्तर डब्ल्यूएचओ के मानक से अधिक होना है। पीएम-2.5 के कणों में 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की वृद्धि होने पर प्रतिदिन मरने वालों की संख्या 1.4 प्रतिशत अधिक हो जाती है।